Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full |best| -

इस मंत्र के माध्यम से भक्त शत्रुंजय क्षेत्र की महिमा का गुणगान करते हैं और यहाँ सिद्ध हुए अनंत आत्माओं को नमन करते हैं।

तीसरा चैत्यवंदन 'रायण पगलिये' नामक स्थान पर किया जाता है। प्रार्थना: "आदि जिनेश्वर रायना, छे पगला मनोहार, भाव सहित भक्ति करे, पहोंचाडे भवपार... रायण रुख तळे बिराजी, दीओ जगने संदेश, भवियण भावे..."। मान्यता है कि स्वयं भगवान ऋषभदेव ने इसी स्थान पर पहले पगलियां (पगलियाँ – पैरों के निशान) छोड़े थे। इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां का चैत्यवंदन मोक्ष के निकट पहुंचने का प्रतीक है। palitana 5 chaityavandan in hindi full

पालीताना ५ चैत्यवंदन की सूची (List of 5 Chaityavandans) छे पगला मनोहार

पांचवां और अंतिम चैत्यवंदन शीर्ष पर स्थित आदिनाथ भगवान (प्रथम तीर्थंकर) के मंदिर में होता है。 आदिनाथ भगवान जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं और यह मंदिर शत्रुंजय पर्वत की यात्रा का चरम बिंदु माना जाता है। प्रार्थना: "आदिदेव अलवेसरु, विनितानो राय; नाभिराया कुल मंडणो, मरुदेवा माय। पांचशे धनुषनी देहडी, प्रभुजी परम दयाळ, चोराशी लख पूर्व तणु, जस आयु विशाल।"। यह चैत्यवंदन यात्रा की सफलता और मोक्ष प्राप्ति के संकल्प के साथ संपन्न होता है। भाव सहित भक्ति करे

"पुंडरीक स्वामी वंदिए, जेणे पाम्या केवलज्ञान; शत्रुंजय गिरिराज ना, प्रथम गणधर महान।"

"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव धरीने जे चढे, तेने भव पार उतारे. अनंत सिद्धनो ऐह ठाम, सकल तीर्थनो राय; पूर्व नवनु ऋषभदेव, ज्यांईं ठविया प्रभुपाय."

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